चलती ट्रेन में सफर करना हर यात्री का अधिकार है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से प्रयागराज के नैनी और छिवकी स्टेशन के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह अधिकार खौफ में बदल गया था। खिड़की के पास बैठकर मोबाइल चलाना मानो दाव पर लगाना हो गया था। वजह थी एक शातिर गैंग,
जो फिल्मी स्टाइल में वारदात को अंजाम देकर पलक झपकते ही गायब हो जाता था। आखिरकार Government Railway Police यानी GRP ने इस गैंग का पर्दाफाश कर यात्रियों को राहत की सांस दी है।
कैसे देते थे वारदात को अंजाम
GRp की जांच और पकड़े गए आरोपियों के बयान से जो कहानी सामने आई है, वह किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। गैंग के सदस्य सुनियोजित तरीके से काम करते थे।
- निशाना साधना: 4 से 5 सदस्य सामान्य ट्रेनों में चढ़ जाते थे। ये लोग आम यात्रियों की तरह व्यवहार करते, लेकिन इनकी नजरें लगातार उन यात्रियों पर रहती थीं जो खिड़की के पास बैठकर महंगे मोबाइल चला रहे होते थे।
- झपट्टा और चेन पुलिंग: जैसे ही कोई यात्री मोबाइल इस्तेमाल में व्यस्त होता, गैंग का एक सदस्य झपट्टा मारकर मोबाइल छीन लेता। यात्री कुछ समझ पाते उससे पहले ही दूसरा साथी चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोक देता। पूरी घटना 10 से 15 सेकंड में हो जाती थी।
- फिल्मी अंदाज में फरार: ट्रेन रुकते ही बदमाश ट्रैक की तरफ कूद जाते थे। पहले से ही ट्रैक के किनारे तैयार खड़ी एक लग्जरी SUV में बैठकर वह हाईवे की तरफ निकल जाते थे। तेज रफ्तार गाड़ी की वजह से पीछा करना लगभग नामुमकिन हो जाता था।
इसी अंदाज की वजह से यह गैंग लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। नैनी और छिवकी के बीच लगातार हो रही लूट की घटनाओं ने यात्रियों में दहशत पैदा कर दी थी। हर सफर में लोग डरे-सहमे रहते थे कि कहीं अगला निशाना वो न बन जाएं।
GRP की स्पेशल टीम ने ऐसे घेरा
लगातार मिल रही शिकायतों और यात्रियों में बढ़ते डर को देखते हुए GRP प्रयागराज हरकत में आई। वरिष्ठ अधिकारी अरुण कुमार पाठक की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने सबसे पहले उन सभी जगहों को चिह्नित किया जहां इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही थीं। मुखबिरों को एक्टिव किया गया और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली गई। कई दिनों तक सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी ट्रेनों में सफर करते रहे। संदिग्धों की लोकेशन, मोबाइल टॉवर डंप और स्थानीय दुकानदारों से मिली जानकारी को जोड़कर पुलिस ने गैंग के मूवमेंट को ट्रैक किया।
कई दिन की मेहनत के बाद पुलिस को कामयाबी मिली। छापेमारी के दौरान गैंग के मुख्य सदस्यों को दबोच लिया गया। उनके पास से लूटे गए कई मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद हुए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि फरार होने के लिए इस्तेमाल की जा रही लग्जरी SUV भी पुलिस के हत्थे चढ़ी।
यात्रियों के लिए राहत, लेकिन सावधानी जरूरी
इस गिरफ्तारी के बाद नैनी-छिवकी रूट पर सफर करने वाले यात्रियों ने राहत की सांस ली है। GRP का कहना है कि पकड़े गए आरोपी शातिर हैं और इन पर पहले से कई मामले दर्ज हैं। पूछताछ में और भी कई वारदातों का खुलासा होने की उम्मीद है।
हालांकि पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद रेल यात्रियों को अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। GRP की तरफ से कुछ जरूरी सलाह भी दी गई हैं:
- खिड़की के पास बैठकर मोबाइल का इस्तेमाल न करें, खासकर रात के समय।
- महंगे फोन और लैपटॉप को बैग में रखें और सफर के दौरान बार-बार बाहर न निकालें।
- किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को ट्रेन में घूमते हुए देखें तो तुरंत GRP हेल्पलाइन 139 पर सूचना दें।
- चेन पुलिंग सिर्फ आपातकालीन स्थिति में करें। गलत इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
फिट और मुस्तैद पुलिस टीम की तारीफ
इस पूरे ऑपरेशन में स्पेशल टीम के जवानों की फुर्ती और फिटनेस ने अहम भूमिका निभाई। ट्रैक किनारे दौड़कर संदिग्धों को पकड़ने वाले दरोगा जी और उनकी टीम की फिटनेस देखकर आम लोग भी हैरान रह गए। रेलवे पुलिस ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है।
प्रयागराज में पकड़ा गया यह गैंग इस बात का उदाहरण है कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर हों, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं। अब उम्मीद है कि नैनी-छिवकी के बीच सफर करने वाले यात्रियों का सफर फिर से सुरक्षित और बेफिक्र होगा।











